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अण्‍णाभाऊ साठे महाराष्ट्र की धरती का सोना है : बाबा समर्थ

Nagpur Today : Nagpur News

– महाराष्ट्र की धरती के लिए का हीरक जयंती समारोह,राजू प्रधान की अध्यक्षता में आयोजन

नागपुर: अण्‍णाभाऊ साठे मानवतावादी लेखक थे। शोषण से मुक्ति उनका जुनून था। उन्होंने दलितों, शोषितों, पीड़ितों का शोषण के खिलाफ जिंदगी भर संघर्ष किया । लेकिन उनके जैसे युग निर्माता को उनके जीवन में केवल उपेक्षा ही मिली। विदर्भ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता बाबा समर्थ ने कहा कि अण्‍णाभाऊ साठे महाराष्ट्र की काली मिट्टी का सोना है।
लोकशाहीर अण्‍णाभाऊ साठे हीरक जयंती के अवसर पर विदर्भ टाइगर सेना के केंद्रीय अध्यक्ष राजू भाऊ प्रधान ने एक बहुत ही सुंदर कार्यक्रम आयोजन किया था। विदर्भ
टाइगर सेना द्वारा गांधीबाग स्थित जैन भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में अहमद कादर, करतार सिंह, गजानन गायकवाड़, शांता पगारे और राजेश प्रधान मंच पर मौजूद थे।

अण्‍णाभाऊ साठे का नाम मराठी व्यक्तिके दिलोदिमाग में एक बडे शाहीर की तौर पर लिखा हुआ है इसलिए, अण्‍णाभाऊ की शाहिरी की आवाज़ उनके जन्मदिन पर ना सुनी जैसा ऐसा हो ही नही सकता। इस बात के महत्व को समझते हुए, राजू प्रधान ने एक अलग शाहिरी के कार्यक्रम आयोजन इस वक्‍त किया था। संगीतकार विजय नायडू, अरुण सुरजूसे, शाहीर योगेश खडसे और गायक सूर्यभान शेंडे द्वारा अण्‍णाभाऊ की रचनाओं को प्रस्‍तुत किया गया । उनके साथ ढोलक पर विठ्ठल पी., सह गायक नितिन सरोदे और श्रीमती बोरकर भी थे। साउंड प्रशांत आगलावे ने संभाला । कार्यक्रम का मंचसंचलन अरुण सुरजूस ने किया।

इस अवसर पर, विदर्भ के एक कार्यकर्ता, अहमद कादर ने कहा कि भाषा के आधार पर प्रांत बनाने के विचार को अण्‍णाभाऊ का विरोध था। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठायी थी। इसी प्रकार, विदर्भ के कार्यकर्ताओं ने हमेशा भाषा-आधारित क्षेत्रीय संरचना का विरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय अन्नभाऊ के विचारों का सम्मान किया गया होता, तो विदर्भ में समस्याएं समाप्त हो जातीं। उपेंद्र शेंडे ने विचार व्यक्त किया कि अण्‍णाभाऊ एक लेखक थे जिन्होंने सामाजिक प्रतिबद्धता को बनाए रखा और सामाजिक परिवर्तन के हथियार हात मे लेकर उन्‍हो साहित्‍य लिखा । दलित, पीडित लोक उनके साहित्‍य कें केंद्रबिंदू रहे । गजानन गायकवाड़ ने विचार व्यक्त किया कि अण्‍णाभाऊ के साहित्य से हमेशा ऊर्जा मिलती रही है। उन्होंने कहा कि उनका साहित्य आम आदमी के लिए एक आंतरिक प्रेरणा और उसके सुख और दुखों को चित्रित करने की प्रवृत्ति को दर्शाता रहा है।

पूर्व विधायक उपेंद्र शेंडे, बाबा समर्थ, प्रवीण शेंडे, भगवान खडसे, अहमद कादर, बावन नेहरू नगर, गणेश ढोके, रमेश ढोके, ईश्वर डोंगरे, राजेश डोंगरे, प्रभाकर वानखेड़े, मधुकर शेलके, प्रेम तायडे, सुनील कुमार इंगोले, रिता सरोदे, वीणा प्रधान, सुनीता ठाकरे, शांताबाई अडागले, विजयताई धोठे, जोसेफ माडक, प्रशांत खडसे, अनिल बावने, अनूप समर्थ, उमेश गायकवाड़, हिमांशी प्रधान, धाकने, नीटू प्रधान, शांताराम प्रधान, राजेश प्रधान, गजानंद गायकवाड़, आदित्य प्रसाद संजय भास्कर, गोलू कामडी, सुनील चोखरे, प्रवीण राउत, कीर्तनकार साईराम, भाईजी मोहोड़, कन्नू चौबे, सुरेंद्र शुक्ला, सुधीर खड़से, शेखर हीवराले, अरुण कावड़े, उमाकांत साल्वे, चंद्रभान खडसे, संजय शेलके, संजय शेलके , कमलाकर वानखेडे, पंकज वानखेडे, दद्दा वानखेडे, सोनू वानखेड़े, सुधीर खडसे ने इस कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रयास किये ।

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