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क्या बिकाऊ है नागपुर मीडिया ? क्या विज्ञापन दे इसे ख़रीदा जा सकता है ?

Nagpur Today : Nagpur News

जी हाँ, आपने सही पढ़ा!

” क्या नागपुर मीडिया घरानों को विज्ञापन दे ख़रीदा जा सकता है ?” ,

कुछ व्यापारी ऐसा ही मानते है, और बोलने से भी नहीं हिचकिचाते। विगत रविवार को ‘नागपुर टुडे’ ने एक समाचार प्रकाशित किया था जिसका संदर्भ शहर के एक सराफा व्यापारी द्वारा अपने दुकान के प्रचार मेंं लगाये गये होर्डिंग से था।

क्या विज्ञापन होर्डिंग के माध्यम से नागपुर सराफा व्यापारी ही बन रहे ग्राहकों के जान के दुश्मन ?

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इस खबर में भी ‘नागपुर टुडे’ ने स्पष्ट किया था कि विज्ञापन और प्रचार करने में बिलकुल भी दोष नही।

लेकिन, बिना सोचे -समझे उठाये गए कुछ कदम दुष्परिणामोंं का कारण भी बन सकते हैंं। साथ ही कुछ सवालों के साथ सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया था।

संबंधित खबर में ना ही ज्वेलर्स की आलोचना की गई थी और ना ही नागपुर के आत्म-सम्मान पर कोई चोट की गई थी। ढेर सारे गहने से लदे हुए व्यक्ति को उस इलाके में पहचान कर घात लगाना क्या आसान नही होगा अपराधियों के लिए ?

वैसे भी, ‘लाकडाउन’ के पांच महीनों से अपराध जगत में भी असहज अशांति चल रही है ।

शहर के सभी सराफा व्यापारी ईमानदार हैं और उनके गहने,शुद्धता और मार्केटिंग दोनों, सभी को पसंद हैंं।

ये नया तरीका भी बेहद ही बढ़िया है , ग्राहक भी संतुष्ट और खुश हैंं। लेकिन,होर्डिंग्स पर ग्राहकों की तस्वीर तक तो ठीक है लेकिन इलाके का नाम डालने से उनके ग्राहकों को ही खतरा हो सकता है ।

बेहद विनम्रता और जनहित की भावना से ‘नागपुर टुडे’ ने इन मुद्दों की ओर ध्थान आकृष्ट किया।साथ ही इस सराफा व्यापारी की प्रशंसा भी की।

परंतु ,लगता है संबंधित सराफा व्यापारी को शुभचिन्ता से भरा यह लेख अच्छा नहीं लगा और सोशल मीडिया पर अपने साथियों की मदद से उसे ट्रोल करने के साथ ही पूरी मीडिया की नीयत पर ही सवाल खड़ा करने में लग गए।

सफाई देना तक ठीक था,लेकिन उनका यह कहना कि आप ने विज्ञापन नहीं दिया, इसलिए……।यह गलत है। घोर आपत्तिजनक है।

इस कथन का क्या अर्थ क्या निकाला जाए– ” नागपुर से निकलने वाले अखबार को विज्ञापन दे दो और वह आपकी हर गलती को सही बता के आँख बंद कर ले ” ?

नागपुर के मीडिया हाउस, जिनके आदर्श , सत्यता , निष्पक्षता, बेबाक तरीके से तथ्यों को सामने लाने का माद्दा सर्वविदित है , जो भी गलत हो , जनहित के लिए तकलीफ बने या समाज की सुरक्षा के हित मे ना हो उसपर शब्दों के माध्यम से जनता का ध्यान आकृष्ट करना ही मीडिया का कर्तव्य है।प्रभावित चाहे जो हो ।


‘नागपुर टुडे’ की बात भी यही साबित करती है।संबंधित सराफा व्यापारी के दुकान का विज्ञापन भी नियमित मिलता रहा है ।अब,आगे मिले ना मिले उससे फर्क नही पड़ता ।


केवल विज्ञापन के चलते गलत को सही कहना ‘नागपुर टुडे’ तथा अन्य किसी भी मीडिया हाउस की नीति हो ही नही सकती ।


जनहित में सच लिखने पर हम जैसे मीडिया हाउस पर तंज कसकर लांछन लगाना बेहद आसान है , लेकिन सच के लिए, जनहित में तथ्य के साथ अडिग रहना हमारा स्वभाव है ।

क्या बिकाऊ है नागपुर मीडिया ? क्या विज्ञापन दे इसे ख़रीदा जा सकता है ?



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